आर.सी.एम् का जोश भरा सब्द
तुम यु ही सोचते रहोगे , दुसरे बढ़ जायेंगे ,
तुम यु ही टालते रहोगे, दुसरे कर जायेंगे,
अबसर कभी रूकती नही , आगे बढ़ जायेंगे,
खली हाथ रहोगे, सपने मर जायेंगे । 'जय आर.सी.एम्.'
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जीवन नेया की डगर में ना कोई किसी के हे फिकर में !
बाँट दिया नदिओं को भी हमने जो रहेती कभी एक सागर में !
हाय रब्बा धोका दिया इन्सान हर इन्सान को , कीओं तेरे बन्दे सहेते हर दर्द और हर इल्जाम को !
खुसी बात की हमको है आर.सी.एम् दिया फरिस्ते के नाम को !
दूर करेगा सबके दुःख को पुरी होगी सबकी आशाएं !
जन जन के जीवन को ये स्वर्ग बनाने आया है !
मिल जाओ है मानव जन खुदा लोट के आया है !! "जय आर।सी.एम्" !!
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तेजस्वी सम्मान खोजते नेहिं गोत्र बतलाके !
पते हे जग में प्रसस्ति अपना करतब दिखलाके !!
हिन् मूल की और देख जग ग़लत कहे या ठीक !
बीर खीच कर ही रहते है इतिहासों में लिक !! "जय आर.सी.एम्"
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